सत्यमत-मुंगेली। छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस-2026 के अवसर पर 2 नवंबर को जिला मुख्यालय स्थित धनंजय सिंह परिहार स्टेडियम में आयोजित राज्योत्सव कार्यक्रम में शिक्षा विभाग की आकर्षक शैक्षणिक प्रदर्शनी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी। प्रदर्शनी में ‘जादुई पिटारा’ शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) के माध्यम से खेल-खेल में शिक्षा तथा देवभाषा संस्कृत के प्रचार-प्रसार को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी के माध्यम से बच्चों को सरल, रोचक एवं गतिविधि आधारित शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया गया।
जिला शिक्षा अधिकारी एमएल पटेल एवं डीएमसी स्कूल शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देश में तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारी प्रतिभा मंडलोई, मनीषा पाटले एवं विमित्रा धृतलहरें के मार्गदर्शन में प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसमें बीआरसी मुंगेली सूर्यकांत उपाध्याय एवं जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों का सहयोग रहा।
प्रदर्शनी में बच्चों की रुचि, समझ एवं सीखने की क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रकार की शिक्षण सामग्री प्रस्तुत की गई। इसमें सम-विषम संख्या कार्ड, मोतियों की टोकरी, वजन तराजू, स्थानीय मान कार्ड, गुणन चक्र, पर्यायवाची चक्र, मात्रा चक्र सहित अनेक शैक्षणिक खेल सामग्री शामिल रही। इन सामग्रियों के माध्यम से गणितीय अवधारणाओं एवं भाषा संबंधी ज्ञान को सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाने का प्रयास किया गया।
खेल-खेल में सीखने पर जोर
‘जादुई पिटारा’ का मुख्य उद्देश्य बच्चों को खेल एवं गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा से जोड़ना और बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) के लक्ष्यों को प्राप्त करना है। इसके अंतर्गत शिक्षण सामग्री बच्चों की पहुंच में रखी जाती है, जिससे वे स्वयं उसका उपयोग कर अनुभव आधारित शिक्षा प्राप्त कर सकें। इससे बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, तार्किक चिंतन एवं स्व-अधिगम की प्रवृत्ति विकसित होती है।
प्रदर्शनी में सांकेतिक भाषा (साइन लैंग्वेज) से संबंधित जानकारी भी प्रस्तुत की गई। इसके माध्यम से बच्चों को संवाद के विभिन्न माध्यमों से परिचित कराने के साथ समावेशी शिक्षा की भावना को प्रोत्साहित किया गया।
संस्कृत के महत्व से कराया परिचित
देवभाषा संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए डॉ. रामबाबू मिश्र द्वारा विशेष प्रदर्शनी प्रस्तुत की गई। इसमें संस्कृत भाषा के शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं व्यावहारिक महत्व को रेखांकित करते हुए लोगों को इसके अध्ययन एवं संरक्षण के प्रति प्रेरित किया गया।
प्रदर्शनी के प्रस्तुतकर्ता शिक्षक एंजल भारत, परवीन बेबी दिवाकर एवं डॉ. रामबाबू मिश्र रहे। इनके द्वारा प्रस्तुत शिक्षण सामग्री एवं शैक्षणिक गतिविधियों ने शिक्षा को अधिक सरल, आनंददायक एवं सहभागितापूर्ण बनाने का संदेश दिया।
यह प्रदर्शनी इस बात का उदाहरण बनी कि शिक्षा को खेल, गतिविधियों एवं अनुभवों से जोड़ने पर बच्चों के लिए सीखना अधिक सहज और प्रभावी बनता है। वहीं संस्कृत जैसी समृद्ध भारतीय भाषा के प्रचार-प्रसार के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में भी सार्थक पहल की गई।