सत्यमत-

मुंगेली / ग्राम सिपाही में आज दिनांक 07 अक्टूबर 2026 को प्रातः 9 बजे संस्कृत विषय के प्रति विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों में रुचि एवं जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में संस्कृत भारती जनपद मुंगेली के जिला संयोजक डॉ. रामबाबू मिश्र ने बच्चों से संवाद करते हुए संस्कृत भाषा के महत्व तथा इसे सरल, सहज एवं रोचक तरीके से सीखने के विभिन्न नवाचारों की जानकारी दी।
डॉ. मिश्र ने बच्चों को उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए कहा कि “संस्कृत नहीं तो संस्कार नहीं।” उन्होंने बताया कि संस्कृत को केवल एक विषय के रूप में न पढ़कर दैनिक जीवन से जोड़कर सीखना चाहिए। खेल-खेल में सीखने, चित्रों, कहानियों, श्लोकों एवं दैनिक बातचीत के माध्यम से बच्चों में संस्कृत के प्रति सहज रुचि विकसित की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रतिदिन केवल 10 से 15 मिनट संस्कृत का अभ्यास कराया जाए। आसपास की वस्तुओं, फलों, सब्जियों, रंगों आदि के नाम चित्रों के माध्यम से संस्कृत में सिखाए जा सकते हैं। इससे बच्चों को संस्कृत शब्दावली याद करने में आसानी होगी।
दसवीं के बाद भी संस्कृत पढ़ने का अवसर
डॉ. मिश्र ने बताया कि अनेक बच्चे कक्षा 10वीं के बाद संस्कृत विषय की पढ़ाई आगे जारी नहीं रख पाते, लेकिन अब संस्कृत विषय को पत्राचार/दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से घर बैठे पढ़ने का अवसर भी उपलब्ध हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को संस्कृत शिक्षा से जुड़े ऐसे अवसरों की जानकारी प्राप्त कर आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत सीखने की कोई आयु-सीमा नहीं है और रुचि रखने वाला व्यक्ति घर बैठे भी संस्कृत का अध्ययन कर सकता है।
कहानियों और श्लोकों से संस्कृत सीखने पर जोर
कार्यक्रम में पंचतंत्र की सरल कहानियों को संस्कृत एवं चित्रों के माध्यम से बच्चों को सुनाने तथा छोटे-छोटे श्लोकों एवं संस्कृत गीतों का अभ्यास कराने की बात कही गई। डॉ. मिश्र ने स्पष्ट उच्चारण एवं नियमित अभ्यास को भाषा सीखने का महत्वपूर्ण आधार बताया।
घर के वातावरण में संस्कृत का प्रयोग
उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि घर में छोटे-छोटे संस्कृत वाक्यों का प्रयोग किया जाए। बच्चों द्वारा संस्कृत में थोड़ा भी बोलने का प्रयास करने पर उनका उत्साहवर्धन एवं सराहना की जाए, जिससे उनमें संस्कृत बोलने का आत्मविश्वास बढ़े।
कार्यक्रम में सरपंच के पिता रामभरोसा साहू,धर्मेंद्र साहू,भूपेंद्र साहू,शिवम यादव,भवानी यादव,नीलेश यादव उमेश,कोमल साहू, नरोत्तम साहू, जिगर, रामसनेही साहू, कौशल साहू, बबली, रामसुमेर सहित ग्रामीणजन एवं बच्चे उपस्थित रहे। सभी ने संस्कृत को सरल एवं रोचक तरीके से सीखने के इस नवाचार को उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया।
कार्यक्रम के अंत में संस्कृत भारती जनपद मुंगेली के जिला संयोजक डॉ. रामबाबू मिश्र ने उपस्थित सभी बच्चों एवं ग्रामीणजनों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं तथा संस्कृत भाषा को दैनिक जीवन से जोड़ने और संस्कृत शिक्षा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
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