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छत्तीसगढ़ी भाषा को जनगणना पोर्टल में शामिल करने की मांग, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ी को मातृभाषा कॉलम में स्थान देने की मांग तेज, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

सत्यमत-मुंगेली / छत्तीसगढ़ी भाषा को आगामी जनगणना 2026-27 के स्व-जनगणना पोर्टल में शामिल करने की मांग को लेकर संगठन द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री (रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त, भारत), मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन कलेक्टर, एसडीएम एवं तहसीलदार के माध्यम से प्रेषित किया गया।

ज्ञापन में बताया गया कि भारत सरकार द्वारा जारी स्व-जनगणना पोर्टल के मातृभाषा कॉलम में “छत्तीसगढ़ी भाषा” को स्थान नहीं दिया गया है, जबकि नेपाली जैसी विदेशी भाषा और अंग्रेजी का उल्लेख किया गया है। संगठन ने इसे छत्तीसगढ़ी भाषी जनता के साथ अन्याय बताया है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि 28 नवंबर 2007 को छत्तीसगढ़ शासन एवं राजभाषा आयोग द्वारा छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिया जा चुका है। साथ ही यह भी बताया गया कि छत्तीसगढ़ और उससे लगे राज्यों—महाराष्ट्र, ओडिशा और मध्यप्रदेश में लगभग 3.5 करोड़ लोग छत्तीसगढ़ी भाषा का उपयोग करते हैं, जो कई अनुसूचित भाषाओं से अधिक है।
संगठन ने यह भी कहा कि यदि जनगणना फार्म और पोर्टल में छत्तीसगढ़ी भाषा का विकल्प नहीं होगा, तो वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आ पाएंगे, जिससे भविष्य में भी भाषा की उपेक्षा जारी रहेगी।

 

 

 

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